2008-07-19

किताबे -माजी मे है बहुत से किस्से ....किसे कहे अब ओर किसे छोडे

हते है मेडिकल कॉलेज में P.G की डिग्री आपको अवार्ड दी जाती है आपके उसके हक़दार कभी नही हो सकते और अंडर-ग्रेजुएट के एक्साम में आप बड़ी मेहनत से उस एक्सामनर की सारी कोशिशों पर पानी फेर देते है. जो आपको पास करना चाहता है.
साल दूसरा था ओर फोरेंसिक मेडीसिन का इन्टरनल एक्साम था सुब्रहमन्यम सर अपने डिपार्टमेन्ट में वक़्त पर आते है ओर एक्साम की कवायद शुरू होती है ...पहली कवायद स्पॉट speciman है जिसमे हमें अलग अलग स्पेसिमन को identify करना है .कुछ भी हो सकता है बॉडी के पार्ट्स से लेकर कोई स्नेक भी या कोई poison भी.वक़्त निश्चित है एक एक बैच को बारी बारी जाना है .जिसकी जो समझ में आ रहा है वो लिख रहा है.हम वही है हालात के मारे रोल नंबर एक .जैसे तैसे गाड़ी आगे खीच लेते है .
१५ मिनट का गेप मिलता है .इसके बाद viva शुरू होगा .सुब्रहमन्यम सर अचानक गुस्से में बाहर आते है उनका चेहरा तमतमाया हुआ है .हाथ में शीट है " ये रोल नंबर ३५ कौन है ?"

 जिस तरह नदी फटती है उस तरह से सारे लोग उसके आस पास से छिटक जाते है .शिबू अचानक गोल घेरे के बीच खड़ा दिखायी देता है.वे धीरे धीरे उसकी ओर बढ़ते है .
"विनायक' वे तेजी से चिल्लाते है .विनायक डिपार्टमेन्ट का कर्मचारी है

" specimen लायो " विनायक specimen की एक बोतल  थामे प्रकट होते है .
.'testis' समूह में फुसफुसाहट specimen पहचान लेती है.
ये किडनी है ?वे शिबू के नजदीक आकर कहते है .

फ़िर धीरे से उसके ओर नजदीक जाकर झुक जाते है 
 "तुम साला लड़का होकर, ये गलती कैसे कर सकता है ??"
"मेरे २० साल के करियर में ऐसा नही हुआ ?"वे सर हिलाते है  "कोई जवाब है तुम्हारे पास"
'सर "शिबू डरते डरते बोलता है ."मुझे लगा फोर्मलिन में पड़ी पड़ी सुकड़ गयी है "
विनायक वे फ़िर जोर से चिल्लाते है .'आज viva रोल नंबर ३५ से शुरू होगा.".
क़्त एक्साम के दिनों में रुकता नही ,भागा चला जाता है .लोग तरह तरह के टोटके अपनाते है ,कुछ लोग एक ही कमीज पेंट पहने रहते है ,शिबू बस
दाढ़ी बढ़ा  लेते है. viva पर ही शेव होती है. दो बार एक बार सीधी एक बार उलटी.
फोरेंसिक मेडीसिन का दिन आता है ,शिबू का दूसरा बैच है
शिबू अन्दर घुसता है .external examnier कुछ पूछे उससे पहले सुब्रहमन्यम सर विनायक को इशारे से किडनी का specimen आगे करने को कहते है "?  हाथ की छड़ी घूमती है ओर सीधी किडनी के स्पेसिमेन पर आकर रूकती है ? 

दो बार खटखटा के वे पूछते है "what is this young boy.?"
'testis सर
" शिबू आत्मविश्वास से भरा जवाब देता है.


पुनश्च :शिबू आजकल उत्तरांचल के किसी मेडिकल कॉलेज में फोरेंसिक मेडीसिन पढाते है




कुछ ऐसी ही दुःख भरी कहानिया यहाँ देख सकते है ....
रोल नंबर एक हाज़िर हो
बा -अदब मुलाइजा होशियार रोल नंबर एक आ रहे है

34 टिप्‍पणियां:

  1. क्यों बीते हुये दिन याद दिलाते हो..
    एक रिज़वी साहब थे कानपुर में, हम से पता नहीं कितने बैच सीनियर,
    मेरा बैच पैरा 'ओ ', और उनका एडमिशन हुआ था पैरा ' एच 'में, पर थे मेरे ही साथ ही ।
    ई.एन.टी. का वाइवा, सब भागे चले जा रहे थे ।
    उन्होंने रोका " क्या बात है डियर्स, बड़ी जल्दी है ? "
    सर, ई.एन.टी.का वाइवा है, वह चौकन्ने हुये, "कौन सा बैच ? " जी- 'ओ' !
    उन्होंने ऊँगलियों पर हिसाब लगाया, बुदबुदाये, 'यार मेरा भी स्साला इसी में होना चाहिये..फिर चहके हाँ हाँ इसी में है !
    तुमलोग चलो हम आते हैं, और हाँ लल्लन को बता देना रिज़वी साहब आ रहे हैं ।"
    फिर घूम कर बोले,"अमें शुक्ला जी चार पान बाँधों, जल्दी से । चिकेन बनवाया था, सोचा आज तानी जायेगी, अब स्साला ये बवाल ।"
    लल्लन यानि कि डिपार्टमेन्ट का म्यूज़ियम अटेन्डेन्ट, लोगों को प्राम्ट करके पास करवा देने का हिमायती,
    रिज़वी साहब से तो याराना ही था । रिज़वी बुलाये गये, मिडिल ईयर की एक बोन दिखायी गयी,
    छोटी सी नन्हीं सी होती है,यह..अभी नाम तो मुझे भी याद नहीं । 'पहचाना इसे, अच्छा चलो कहाँ की है, यही बता दीजिये ?'
    एक्ज़ामिनर महोदय कई बार इनसे मिल चुके थे, बोले बता दोगे तो इस बार क्लीयर कर दूँगा । सहसा रिज़वी खिल गये," सच्ची ? "
    और कनखियों से लल्लन को ताका, लल्लन फ़ुसफ़ुसा कर बोला, "साहब कान की..कान की है !"
    रिज़वी ने सुना, बड़े आत्मविश्वास से बोले, "अरे सर, रान की हड्डी है, यह तो ! इसका नाम भी बताऊँ ?"
    बंसल सर ने झट से कुर्सी थाम ली, नहीं नहीं आप रहने दें, बस यहाँ से चले जाइये ।"

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  2. हा हा हा हा ...... हँसते हँसते पेट दर्द हो गया.... आप दो डाक्टरों ने अपनी कहानी सुना दी अब मेरी बारी....

    मैं सी सेक्सन में था और मनोज बी में.... हिन्दी के टीचर ने A, B और C सभी छात्रों को साथ बुलाया और मनोज को आगे कर कहा की अपनी monthly test copy का answer पढो.... उसने नही पढ़ी... टीचर ने उत्तर पढ़ना शुरू किया..... पेज नम्बर ६३ में देखे... कवि कहना चाहता है कि.................. मनोज ने के पेपर से पेज नम्बर ६३ में देखे भी कॉपी कर लिया था..... बड़ी हसी आई थी..... आज भी सोचकर हम दोस्त हस लेते हैं

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  3. यादों का पिटारा खुल गया और नई याद फ़िर से लिखी गई :) डॉ अमर का किस्सा भी पढ़ना रोचक रहा

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  4. ha ha ha !!!!
    mast hai !!!
    saare kisse kah daaliye sir jee!! koi bhi mat chhodiye !! :)

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  5. mazaa aa gayaa sahab!!! Hamein bhi apne viva ke din yaad aa gaye jab kuch na bataane par finally humse Jaya Bhaduri ke patidev ka naam poochha gaya!!

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  6. ".अगर शिबू और रिज़वी साहेब मेरे कालेज के ज़माने में मेरे सीनिअर होते तो मैं उन्हें अपना आईडियल बना लेता..."पता नहीं हमारे ज़माने में इतने महान लोग क्यूँ नहीं पैदा होते थे....
    रोचक प्रसंग. हालाँकि हमें कालेज छोडे पैंतीस साल हो गए हैं लेकिन वहां की शरारतें अभी तक याद हैं...कभी पोस्ट पर ठेलेंगे उनको...आप भी क्या याद रखेंगे.
    नीरज

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  7. maza aa gaya anurag G. sach main abhi likhte samay bhi har raha hu. aur subramanyam G k bare me soch raha hu. ha ha ha

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  8. अनुराग जी यार, क्यों दिल जलाते हो। धक्का लगाते लगाते भी डाक्टरी में प्रवेश नहीं कर पाए। बाद में वकील बन गए।

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  9. बहुत खूब..हँसते हँसते लोटपोट हो गए हम तो.

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  10. maza aaya padhne mein...ye exams baad mein yaad karne par hi sukh dete hain...us wakt to sabse bade dushman hua karte the.

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  11. वाह जी, क्या किस्सागोही है...निराला अंदाज. पूरी पोटली रखें हैं संजो के यादों की. अमर जी ने भी खुश कर दिया. :)

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  12. अनुराग जी,क्या बात हे, तीन सांस मे ही आप का सारा लेख पढ गया, ओर चोथी सांस मे टिपण्णी भी दे दी,बहुत अच्छा लगा आप का लेख,धन्यवाद

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  13. डाक्टरों के बारे में यह अंदरूनी बातें आउट मत करिए , अगली बार किसी डाक्टर साहब के पास जाने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा।

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  14. रात का टाइम है, बहुत जल्दी में आपकी पोस्ट देखी है,पूरी पढने का टाइम तो नही है,कल फुर्सत से पढूंगी लेकिन एक चीज़ ने जो की शायेद गलती से छाप गई है,परेशान किया इसलिए लिख रही हूँ...माज़ी(past) माझी छाप गया है जो काफी बुरा लग रहा है...प्लीज़ इसे ठीक कर दें...हैरत है किसी और ने इसके लिए क्यों नही टोका आपको...आप से बहुत सीखती हूँ, अब थोड़ा सिखा भी दूँ...सॉरी...just joking

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  15. बहुत मजेदार किस्से हैं। अब समझ आया मरीज ठीक क्यों नहीं होते। वे दिखाने कुछ जाते होंगे और डॉक्टर कुछ और ही देखकर किसी तीसरी चीज की दवा देते होंगे।
    घुघूती बासूती

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  16. आप का लिखा हमेशा गहरी सोच का पर्याय बनता जा रहा है पर आज तो हँसी भी आयी और लगा बाबारे ! बोडी पार्टज़ देखके कैसा लगता होगा

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  17. शिबू तो बुद्धिमान हैं/थे। हम तो कहीं उसे उल्का-पिण्ड न कह बैठते।
    हम अपनी बेवकूफियों का पिटारा खोलें तो ब्लॉगजगत में सारा शो-पानी धुल जाये!:)

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  18. khair ye hai ki ye forensic waale doctor hain...inke paas koi zinda aadmi to nahi pahunchega :)

    aap badhiya kissagoi karte hain.

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  19. doctor sahab itne din main online nahi thi. admission ke chakkar mein busy thi. i got admission in kasturba medical college, manipal for M.Sc in Medical Bio chem.


    kyunki main bhi is bio field se vaakif hoon to samajh mein aata hai formalin mein agar kisi organ ko bahut dino tak rakh diya jaaye to kaisa hota hai..

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  20. यह बात हुई ना...,
    यह रंग संयोजन आँखों को बड़ी राहत देने वाला है ।
    लेकिन रंगसंयोजन के साथ ही ताजा माल कहाँ है, गुरु ?

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  21. एक किस्‍सा हमारे शिबू साहब का भी सुनिए। Spot पहचानना था और उसके साथ एक कागज में सवाल दिए गए थे, जैसे पहचान कर वैज्ञानिक नाम लिखो, इत्‍यादि।

    पंद्रह नंबर स्‍पॉट के बारे में हमारे शिबू साहब ने लिखा "यह पत्‍थर है।"

    बाद में पता चला कि उस पर गाजर रखा था। पत्‍थर तो सवाल की पर्ची को दबाने के लिए रखा गया था ताकि वह हवा से उड़ न जाए।

    शिबू साहब की बारी आते तक कोई गाजर खा जाए, खाली प्रश्‍न की पर्ची पत्‍थर से दबी पड़ी हो, इसमें शिबू साहब की क्‍या गलती ?

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  22. "puranee yadon ko shej kr rekhna or unhe dohrana aam baat nahee, liked reading it"

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  23. कॉलेज की लाइफ का अपना ही मजा है। ये कथा भी मजेदार है, पूरी पैसा वसूल।

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  24. कोशिश कर के भी डाक्टरी में प्रवेश नहीं मिल सका,कुछ ऐसे लोगों के कारण जिनको ये भी पता नहीं था कि शरीर में हड्डियां कितनी होती हैं,मनुष्य का कौन सा जबडा मूव नहीं करता.आज वही खास डाक्टर सरकारी अस्पतालों में सी एम ओ /डीन बने हुए हैं.

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  25. सब से पहले तो थैंक्स मेरी बात मानने के लिए,आज फुर्सत से सारा वाक्य पढ़ा, बहुत iteresting लगा, ऐसी बहुत सी यादें होंगी आपके दिल में जिसे आप हम से शेयर कर सकते हैं...किस्सा कोई भी हो, लिखने का आपका जुदा अंदाज़ है जो मुझे बहुत पसंद है....thanks again

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  26. आप सभी का शुर्किया ,दरअसल एक्साम की हड़बड़ी में हम बहुत कुछ सामान्य सा भी ग़लत कर जाते है.शिबू अच्छे इन्सान है ओर बाद में अच्छे नम्बरों से पास हुए थे ,बस कभी कभी हो जाता है......ये किस्सा उन्ही कीअनुमति लेकर लिखा था ....हम सभी ने एक्साम viva में ढेरो काण्ड किये है ........अगर उन्हें सामने लाया जाये तो हम भी मूर्ख लगेंगे.
    rakshnanda shukriya....galti ki taraf dhyaan dilaane ke liye.

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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